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देश की हो गयी १६वीं !

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आइये 16वे साल की बात करते है – बहुत नाज़ुक उम्र कही गयी है –अक्सर जोश में होश नहीं रहता ,ऐसा कहा जाता है .क्या है लेखा-जोखा –क्या है देश की दशा ओर दिशा
2016 का आग़ाज़ पठानकोट पर आतंकी हमले से हुआ ओर देश की सुरच्छा अजेंसियों की कार्यकुशलता पर सवाल खड़े हुए –विरोधियों ने जमकर प्रहार किये .हद तो तब हुई जब सरकार ने पाकिस्तान से हमले की पुष्टि करने के लिये जांच दल को आमंत्रित किया .
गौ हत्या-तस्करी के मिथ्या आरोपों पर दलितों पर हुए अमानवीय अत्याचार की खबरों ने मन खट्टा कर दिया ..ज्यादा हो हल्ला होने पर प्रधानमंत्री जी को भी कहना पड़ा कि मेरे दलित भाइयो पर अत्याचार बंद करो ,चाहे मेरे सीने पर गोली चलाओ . उत्तर प्रदेश मे एखलाख के परिवार पर गोहत्या के आरोप मे अंधी भीड़ ने हमला किया ओर अखलाख की बर्बर हत्या ने देश की साझी संस्कृति पर सवाल खड़े कर दिये ..देश के तीन प्रख्यात साहित्यकार , समाजसुधारको की कथित देशभक्तो द्वारा हत्या ने तो मानो देश मे भूचाल ला दिया .देश-विदेश के मीडिया ने इन खबरों को बड़ा- चड़ा कर प्रस्तुत किया ओर देश की छवि धूमिल हुई . साथ ही देश मे सहिष्णुता -असहिष्णुता पर बहस गर्म हो गयी .कुछ प्रबुद्ध साहित्यकारों-कलाकारों ने हिन्दू संगठनो के कथित हुडदंग -अनाप शनाप बयानबाजियो के विरुद्ध अलग अलग शहरों मे मार्च भी निकाला तो प्रतिक्रिया मे “देशभक्त” बुद्धिजीवियों ने भी इसी तरह जवाब भी दिया .टीवी -मीडिया मे पछ-प्रतिपच्छ नेताओं की गर्मागर्म बहस भी देखने को मिली .
दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या का प्रकरण और जे एन यू मे कथित रास्ट्र विरोधी नारो -भाषणो पर कन्हय्या कुमार ओर उसके साथियो पर “रास्ट्र द्रोह” के मामलो से सरकार के विरुद्द हिटलर शाही के आरोप लगे –देश मे सत्ता विरोधी बहस चल पड़ी , जिस पर सत्ता प्रतिष्ठान ने विरोधियो की आशंकाओ को बेबुनियाद बताया .लेकिन इन प्रकरणो ने बीजेपी को परेशान अवश्य किया .उधर प्रधानमंत्री के विदेशों मे ओजस्वी भाषन ..विदेशी राजनयिको के मध्य मिली प्रशंसा ओर उनकी स्वीकार्यता ने भा ज पा को आत्मबल दिया -अमेरिका ओर भारत के मध्य मैत्री सम्बंधों से भारत की विदेशनीति की खूब चर्चा हुई.
पाक प्रायोजित पठानकोट हमले के बाद उड़ी सैन्य शिविर पर हमले ने तो देश के कान गर्म कर दिये .सेना ओर सरकार का धैर्य जवाब दे गया .इस साल सीमा रेखा उल्लंघन कर पाक आतंकियो ने खासा उत्पात मचाया ,लेकिन हमारे सैनिको ने विशेष कार्यवाही कर सीमापार पाकिस्तान की कई पोस्ट तबाह कर मुँहतोड़ जवाब भी दिया .इस कार्यवाइ मे पाकिस्तान के 2 दर्जन से अधिक आतंकी मारे गये –लेकिन ऐसी आतंकी घटनाओ मे हमारे कई सैनिक भी कुर्बान हुए –सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक के प्रकरण पर बड़े -बड़े बयान दिये जिस पर विपछ ने विरोध किया क़ि सेना पर राजनीति नही की जानी चाहिये .
एकाएक 8 नवंबर को 500 ओर 1000 के नोट चलन से बाहर करने का दुस्साहसिक /ऐतिहासिक फैसला लिया गया .जिसने देश की राजनीति मे हड़कंप मचा दिया –जैसे पूरा देश बेंक मे जमा धन निकालने के लिये लाइन मे लग गया . अर्थशास्त्रीयो के मध्य इस फैसले की नुक्ताचीनी हो रही है. कालेधन के विरुद्ध इसे सर्जिकल स्ट्राइक कहा जा रहा है तो किसान -मजदूर गरीब गुरबा बेहाल है .कल कारखाने बंद है केश की किल्लत से दुकानदार हाथ पे हाथ धरे बैठे है –बेन्को से अपना जमा धन नही निकल पाने के कारण कई लोग लाइनो मे दम तोड गये .कई हैरान परेशान हताश नागरिक फांसी झूल गये .तो देश मे जगह जगह छापे मारे जा रहे है ओर लाखो-करोड़ो के नये नये नोट सोना सहित पकड़ा जा रहा है जब 2-2000 बेंक से निकालने के लिये नागरिक सुबह से शाम तक लाइनो मे खड़े है तो इन लोगो के पास इतने नये नोट कैसे मिल रहे है –बेंक के कर्मचारी भी इस दुष्कर्म मे शामिल पाये गये है -
-देवथान के बाद शादी-ब्याह मे परिजनो को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा लोग जिंदगी भर की कमाई बेटी-बेटे के ब्याह के लिये जमा करते है लेकिन समय पर बेंक से नही मिल रहा है –कमाल हो गया . क्या हो गया मेरे देश को ? कई लोगो ने शादी ब्याह स्थगित तक कर दिये .
नक़दी संकट को देखते हुए सरकार ने डिजिकल एकोनॉमी ‘केशलेस्स या लेस केश को प्रोत्साहित करने की योजना का एलान कर दिया –कुल मिलाकर इस साल देश की जनता ने झटके पे झटके खाये है तो विरोधी दल के नेताओ के भी होश गुम है जब तक सरकार की एक नीति के खिलाफ एकजुट होते है तभी सरकार दूसरा विवादित फैसला लेकर बहस की दिशा मोड देती है ..
इस वर्ष का संसद का अंतिम सत्र भी नोट बंदी जैसे मुद्दे पर बिना कामकाज किये स्वाहा हो गया ओर प्रति दिन के हिसाब से संसद पर होने वाले करोड़ो करोड़ो की राशि कोहरे मे गुम हो गयी ..संसद मे हुए हंगामे पर रास्ट्रपति महोदय तक ने गहरी चिंता व्यक्त की ओर पछ-प्रतिपच्छ को फटकार भी लगाई –देखते ही देखते 5 राज्यो के चुनाव सिर् पे है –जहाँ सरकार की नीतियो की समीच्छा मतदाता करेंगे ओर प्रदेशों की सरकारों के कामकाज का भी खुलकर हिसाब होगा. वैसे भी अपने देश के चुनाव प्रचार में भाषा -आरोप प्रत्यारोप निम्न से निम्नतम स्तर के होते जा रहे है -कथित रूप से विश्व को दिशा देने वाले अपने देश के लिए यह कदापि शुभ संकेत नहीं है –अफ़सोस तब होता है जब सत्ता पच्छ और प्रतिपच्छ के प्रमुख चुनावी दंगल में ऐसी-वैसी ओछी भाषा और भाव भंगिमाओं का प्रयोग करते दिखाई देते है –
.21वी सदी के 16वे साल ने वाकई इतिहास मे नाम दर्ज कर लिया –16वा साल ओर उसके लटके -झटके पर कई कविताये – कहानी- गीत लिखे गये है .लेकिन देश ओर राजनीति के लिये इसके माईने क्या है ए समझना भी जरूरी है –जनवरी से दिसंबर तक की घटनाये इस लिहाज से दिलचस्प है – हैरान -परेशान करने वाली है .आगे -आगे देखिये होता है क्या –वर्षान्त में चंद दिन ही बाकी है ,उम्मीद से रहिये आगामी वर्ष सब अच्छा होगा ..



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