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दूल्हा भी लाइन में ,दुल्हन भी !

Posted On: 12 Nov, 2016 हास्य व्यंग में

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देश की निरीह विरोधी पार्टियों के हाथ जैसे तैसे मुद्दे हाथ लगे थे पूर्व सैनिक की आत्महत्या , सैनिको की वन रेंक पेंशन , एन डी टी वी पर सर्जिकल स्ट्राइक औरजे एन यू के छात्र नजीब की गुमशुदगी जैसे मामलो ने टीवी चेनलो को धुवाँ धुवाँ कर दिया था तू तू -में में की भाप उठने लगी थी सत्ता पच्छ के प्रवक्ताओ को इनके जवाव सूझ नही रहे थे -अगले-बगलें झाँकने पर मजबूर हो गये थे .उधर विरोधी एक -एक कर सरकार पर प्रहार कर रहे थे .

इससे पहिले विरोधी कुछ समझ पाते प्रधानमंत्री जी ने कालेधन पर ब्रह्मास्त्र चलते हुए 500-1000 के नोट बंद करने का फैसला कर हवा का रुख मोड दिया . विरोधियों को सूझ नहीं रहा है -क्या कहें ,क्या ना कहें ? ..उत्तर प्रदेश चुनाव के महारथियो के तो जैसे होश गुम ,हाथ पांव फूल गये -कह रहे है सत्ता पार्टी ने अपना तो इंतजाम कर लिया और हमको बीच मझदार मे डुबो दिया अब चुनाव के लिये 500-1000 के जमा नोटों की बोरियों का क्या करें ? कहाँ डालें -कहाँ से निकाले ? यह तो चीटिंग है –राजनीति मे ऐसा थोड़े ही होता है –खेल मे बड़ी मुश्किल से हमारी बारी आई तो —ना रोते बन रहा है ना ही हंस पा रहे है ..और उधर सत्तादल के नेताओ के चेहरे पर खिली- खिली मुस्कान है -अब बोलो ,बहुत बोल रहे थे बागों मे बहार है ..अब बोलो हमको तुमसे प्यार है …..बोलो ना .विरोधियों के हाथ लगे तोते तो उड़ गए –


विरोधी नेता कह रहे है- बात तो विदेशी कालेधन की हुई थी —-अब बताओ हम क्या करें बाबा रामदेव के आश्रम चले जाये ओर भजन करें क्या ? घड़ी घड़ी ड्रामा –यह अच्छी बात नही है ..और शाहों के शाह प्रधानमंत्री जी मुस्करा रहे है -बचऊ हम जहाँ खडे होते है लाइन वही से शुरु होती है –क्या समझे –


यह तो रही हास-परिहास की बात 9-10 नवंबर की तारीखें देश के दुर्बल-निम्न-ओर मध्यम वर्ग पर कैसे गुजरी है तुम क्या जानो सुधांशु बाबू-?–दवा -अस्पताल –यहाँ तक कि बिना छुट्टे पानी तक को तरस गये है लोग –कुछ बेचारे तो बिना दवा स्वर्ग सिधार गये ..ऊपर से शादी ब्याह के दिन –दूल्हा-दुल्हन -बाराती-घराती सब लाइन में खड़े खड़े ४-४००० निकलने की जुगत में है ,कह रहे है मोदी जी ने शादी को यादगार बना दिया , हमेशा याद रहेगी ..–इन मुसीबत के मारों पर क्या बीत रही होगी ..समझना दुष्कर है -और जब बेंक खुले तो हारी बीमारी के लिये बचा कर रखे 1000-2000 बदलवाने के लिये लाइन मे लगे है –दिन की कमाई गयी पानी मे –है .और फिर दूर दराज गाँव -देहात मे कहाँ है बेंक –? कहाँ से बदलवाए नोट ? एकाध 500-1000 का नोट हाथ मे दबाये बेचारे दर दर भटक रहे है कोई नही है सुनने वाला. देश के लिये हर बार हम गरीब लोगों की ही कुर्बानी क्यों ? मोटे मोटे सेठों का क्या 2-2- 4-4- किलो सोना खरीद लिया ..और भी कई बहाने है कालेधन को ठिकाने लगाने के लिये —फिर कालेधन वालो को करोड़ दो करोड़ की चोट लग भी जाये तो क्या –गरीब को तो बस एक थप्पड़ ही काफी है —-बिना दवा के भी मर जाते है …कीडे मकोडे की तरह —-लेकिन सरकार के इस सराहनीय [?] कदम का स्वागत किया ही जाना चाहिए ..अब क्या है के गरीब-मज़दूर तो वैसे ही हर रोज मरता ही रहता है –लाइन में खड़े खड़े २-३-५ मर भी जाएँ तो देश की सेहत पर क्या फर्क पड़ता है ….यदि समाज के नासूर इन काले कारोबारियों से लाख-दो लाख करोड़ अर्थव्यवस्था में आता है तो देश की बिगड़ती सेहत के लिए बेहतर होगा –फिर प्रधानमंत्री जी के हाथ जो मजबूत करने है –ओम नमो नम :



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