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सदी का १६ वां साल !

Posted On: 31 Dec, 2015 Others,social issues,Others में

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१६ वें साल पर कवियों -शायरों ने तमाम गीत लिखे है ,लिखे जाते रहेंगे -तरुणाई भरी उम्र –हांजी- हाँ देश ही नहीं पूरा विश्व सदी के १६वे साल में प्रवेश कर रहा है ..भले ही १५ वां साल विश्व में अप्रिय ,तनाव भरा रहा -आज भी आई एस ,तालिबान जैसे दुर्दांत आतंकवादी मानवता के लिए खतरा बने हुए है और अमेरिका- रूस जैसे महाबली इन आतताइयों के विरुद्ध मोर्चा खोले हुए है लगता है जैसे ३ सरे विश्वयुद्ध की रूपरेखा तैयार हो रही है . भले ही ऐसे नर पिशाच या कहे भस्मासुर इन्ही हथियार के सौदागर कहे जाने वाले देशो की ही उपज कहे जाते है .
इधर पूरा विश्व कार्बन उत्सर्जन के कारण प्राकृतिक आपदाओ की बढ़ती दुर्घटनाओ से हैरान है -परेशान है -सोचने का समय है , विकास की परिकल्पना को नयी परिभाषा दिए जाने की जरुरत है –कार्बन उत्सर्जन वाले ईंधन का विकल्प ढूंढना मानवता को बचाये रखने के लिए परमाश्यक है . अन्यथा बिना किसी युद्ध के विश्व नागरिक मारे जाएंगे . उल्लेखनीय है भारी प्रदुषण के चलते देश की राजधानी दिल्ली भी गैस चेंबर में तब्दील हो गयी है .
खैर छोडो अपन अपने देश के बारे में सोचते है .. आखिर क्या दिया है इस बीतते साल २०१५ ने … ? नहीं साब बहुत कुछ दिया है –उम्मीद जगाई है हाँ कुछ हो सकता है ,जरूर हो सकता है , इस सरकार की एकमात्र यही उपलब्धि है -क्या ये कम है ?

नयी सरकार बनते ही हर रोज अप्रिय प्रसंग उठते रहे ,सरकार के कुछ नेताओ की ओर से -सरकार के सहयोगी संघटन के प्रतिनिधियों की ओर से भी . जो देश की साझा संस्कृति को चोट पहुँचाने वाले रहे -समाज ,देश और मीडिआ में इन मामलो पर चर्चा-बहस भी खूब चली । अखबारों में इसी तरह की कडुवाहट भरी सुर्खिया बनी रही -चर्चा रही कि देश के प्रधान सेवक का दम्भ भरने वाले मुखिया इन ज्वलंत विषयो पर क्यों चुप रहते है ? ये प्रश्न बुद्धिजीवियों को परेशान करता रहा – देश के जाने माने दो तीन साहित्यकारों की दुर्दांत हत्या पर बवाल हुआ – इन मामलो में तथाकथित रूप से कुछ कट्टर हिंदू संघठनो का हाथ बताया गया -फिर गो मांस की अफवाह पर उत्तर प्रदेश के एक गाँव में मुस्लिम परिवार पर अतिवादियो की भीड़ का हमला हुआ और एक व्यक्ति की हत्या हुई ,जिसने देश को झकझोर दिया ,इस दुर्भाग्यजनक परिस्थिति पर सरकार की चुप्पी के विरोध में कुछ प्रख्यात बुद्धिजीवी अपने पुरूस्कार लौटाने पर विवश हुए , ऐसा संभवत देश के इतिहास में पहली बार देखा गया . इन प्रसंगो से विदेशो में सर्व धर्म सम्भाव वाले हमारे देश की छवि भी धूमिल हुई -यद्यपि प्रधानमंत्री जी ने संसद तक में इन असामाजिक तत्वों को फटकार लगाईं और महामहिम राष्ट्रपति महोदय को भी देश को बांटने वाले तत्वों के विरुद्ध तल्ख़ टिप्पड़ी करनी पड़ी।
उल्लेखनीय है कि आम चुनाव मे आस्चर्यजनक रूप से भारी बहुमत से विजयी भा0ज0पा0 एक-सवा महीने बाद ही दिल्ली प्रदेश चुनाव मे ओँधे मुंह गिर पड़ी ओर मात्र 3 सीट ही हासिल कर सकी ओर लोकसभा चुनाव मे ऐतिहासिक पराजय के बाद बेचारी कांग्रेस पार्टी तो अपना खाता भी नही खोल सकी …,.ओर 16-17 महीने बाद बिहार चुनाव मे भी भा0ज0पा0 अपनी साख बचाने मे नाकामयाब रही -लगा केन्द्र सरकार अपनी चमक खोती जा रही है -देश के मतदाताओ के मन मे क्या है कुछ पता ही नही चलता ,इन प्रदेश चुनावो ने राजपंडितो को हैरान-परेशान कर दिया .

देश में ऐसे अप्रिय वातावरण में भी विदेशो में प्रधानमंत्री के नाम की धूम रही ,उनके ओजस्वी वक्तव्यों को सराहना मिली -अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योग की महत्ता स्थापित ही नहीं हुई ,विश्व भर में योग दिवस मनाया भी गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा जैसे कई देशो के नेता हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी की बुद्धिमत्ता के कायल हुए। स्वच्छता अभियान , जनधन योजना ,अटल पेंशन योजना स्मार्ट सिटी ,डिजिटल इंडिया जैसे कई सपने साकार होते दिखाई दे रहे है -लगा जैसे देश अंगड़ाई लेकर उठा है -
लेकिन जाते हुए वर्ष *१५ में संसद से लेकर सड़क तक अराजकता का नंगा नाच भी देखने को मिला – फिर चाहे चुनाव प्रचार का अति निंदनीय,अशोभनीय स्तर रहा हो या संसद में आरोप-प्रत्यारोप के अरुचिकर प्रसंग .प्राय : ,गली -नुक्क्ड़ो पर उपहास का विषय बने . इन मामलो में सिर्फ विपछि ही नहीं सत्ता पछ के लोगो ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी -शालीनता ,संयम,विवेक जैसे शब्द अपने- अपने अर्थ के लिए व्याकुल रहे ..- रही सही कसर दाल भात और सब्जियों की महंगाई ने पूरी कर दी – सच यह है निर्धन और निम्न वर्ग के लिए अब रसोई में दाल की व्यवस्था अय्याशी हो गयी है .
जो भी अशुभ -बुरी और कड़वी यादें है- वर्ष *१५ के साथ इतिहास के कूड़ेदान में चली जाएंगी। आओ परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना करे- हे प्रभु देश के सब नेताओ को सद्बुद्धि -विवेक प्रदान करे ,ताकि देश का नेतृत्व युवाओ के समछ आदर्श स्थापित कर सके , नागरिको को प्रेरित कर सैके।

पल छिन नित नव नूतन हो

खुशिया बरसें आंगन में

जन गण मन मे मंगल हो
-                       देश मे जो शुभ ,कल्याणकारी और जनहित कारी कार्य हुए है उनकी यादो का दामन पकड़कर नए वर्ष में प्रवेश करें –और ज़ोर से दोनों हाथ उठा कर बोले -” वेलकम * १६ “



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