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चुनावी सर्वेछण के टोटके !!

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हम देखे है टीवी पर चुनाव सर्वेछण कोई किसी को जिता रहा है कोई किसी को ….हप्प ! अय्यैसा कही होता है –इ सब गोरखधंधा का मामला है -वो टीवी वाला कैमरा लेके — पांच सात हजार लोगो से पूछ लिया- भाई वोट किसे दो गे , लो भाई हो गया सर्वेछण। ऐसा भी होता है भला। ।कोइ अपने पेट की बात बताता है —अपनी जोरू को तो कोई मन की बात बताता नहीं है –आप ही बताओ आप किसी को बताते हो का –एकदम फर्जी मामला है सब –आप पूछोगे खेत की अगला बताएगा खलिहान की –अगला सोचता है पता नहीं पूछने वाला किस गिरोह का है –और हम बता दिया सच और ये बात पहुँच गयी ऊपर तो पता नहीं अपन का क्या होगा –वैसे भी आजकल साहित्यकार , पत्रकार तक भाई लोग के निशाने पर है–उनके मन का किया और कहा तो ठीक नहीं तो श्री कलमुर्गी जैसा अंजाम कौन बाल बच्चो वाला चाहेगा। वो कहावत सुने हो लग जाय तो तीर नाही तो तुक्का –ये सर्वेछण का मामला अईसा ही है .
अब आप देखो इन सर्वेछणो की पोल दिल्ली चुनाव में कैसी खुली ? सबने देखा -का हुआ -दोनों बड़ी पार्टी वाले रिजल्ट आने पर गाते फिर रहे है – वो का है ..हां फासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था ..यही हुआ ना ..
-सच तो यह है बिहार में जब गठबंधन के दल भी अभी तक आपस में एकदूसरे को मिठाई खिलाते घूम रहे है पता नहीं कौन कब किस गठबंधन से गाँठ जोड़ ले . अब देख लो जिन नेता जी ने आगे बड कर एन -डी-ए के खिलाफ महागठबंधन का एलान किया था –फटाक से मोके की नजाकत देख कर सुशासन बाबू और अपने समधी लालू जी को पहलवानी धोबीपाट मार बैठे –इधर बी जे पी के अध्यछ जी दलित वोटो के अधिकृत माने जाने वाले ठेकेदार मांझी और पासवान के साथ सांप सीडी का खेल खेल रहे है –रोज नई नई रंग बिरंगी मिठाइयां ऑफर कर रहे है —तो भय्या जी आप ही बताओ जब नेता लोग आपस में में ही अपना मन नहीं खोल रहे है और आप टीवी वाले सर्वेछणो में मतदाताओं के मन की बात जानने का एकदम फिजूल दावा कर रहे है –कही ऐसा तो नहीं आप राजदलो के रेट के हिसाब से दिखा रहे है सर्वेछण –सट्टेबाजों की हवा भांपकर बक बोल रहे है —
हो सकता है भय्या जी टीवी और अखबार को भी तो अपना पेट पालना है –सरकारी विज्ञापन का सवाल है। और फिर इन सर्वेछणो में बेचारे सर्वेछक गाँव -गली–सड़क की धुल फांक कर रिपोर्ट करते है –एंकर भाई लोग टीवी पर बकबकाते रहते है –वो बेचारे छूट भय्या नेता लोग का भी टीवी पर फोटु आ जाता है-पत्रकार लोग भी फिजूल टेम खर्च कर रहे है और सर्वेछण पर भी खर्च होता है, हम जानते है – इतने सारे बेरोजगारो को भी काम मिलता है —तो ठीक है –करते रहिये सर्वेछण –बिहारी मतदाता को क्या फर्क पड़ता है —-हो भी सकता है मतदाता सर्वेछणो में लहर देखता हो –किसकी लहर है। ।——-पता नहीं नेता लोग मतदाता को कब तक मूर्ख समझते रहेंगे –बनाते रहेंगे –भय्याजी अब वो दिन बीत गए जब खलील खान फाख्ता उड़ाया करते थे –अब वे अप डेट और स्मार्ट है —



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